रमा एकादशी 2021

रमा एकादशी – इस वर्ष यह व्रत १ नवम्बर यानि सोमवार को रखा जायेगा | ३१ अक्टूबर को दोपहर २ बज कर २७ मिनट पर एकादशी तिथि आरम्भ हो जाएगी और १ नवम्बर १ बज कर २१ मिनट तक रहेगी | पारण समय २ नवम्बर सुबह ६ बज कर ३४ मिनट से ८ बज कर ४६ मिनट तक रहेगा |

स्कन्द पुराण में कार्तिक महीने का महत्त्व बताते हुए कहा गया है कि यह महीना परम कल्याणकारी, श्रेष्ठ तथा दुर्लभ है | इस माह में आने वाली एकादशी बहुत ख़ास है | कृष्णा पक्ष की इस एकादशी को रमा एकादशी कहते है | दीपावली से पहले आने वाली इस एकादशी  का  बहुत महत्व  है  | इस दिन भगवान् विष्णु तथा लक्ष्मी जी की पूजा होती है | लक्ष्मी माता का एक नाम रमा भी है , यह  व्रत माँ लक्ष्मी जी के नाम पर रखा गया है | लक्ष्मी जी का यह नाम विष्णु जी को सबसे अधिक प्रिय है |

रमा एकादशी का  व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है |

जीवन में धन धान्य की कमी नहीं रहती |

सुख समृद्धि बनी रहती है |

महिलाओं को सुखद जीवन का वरदान मिलता है |

इस दिन विष्णु अवतार श्री  कृष्ण भगवान् तथा तुलसी माता का पूजन श्रेष्ठ माना गया है |

इस व्रत में अन्न जल का सेवन नहीं करते |

पूरा दिन के व्रत के बाद अगले दिन भोजन किया जाता है | कुछ लोग फलाहार कर लेते है , सबकी अपनी मान्यता है |

हरे कृष्णा  हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरे ||

हरे रामा हरे रामा  रामा रामा  हरे  हरे ||

इस जाप को करते रहना चाहिए इस दिन |

रमा एकादशी व्रत की कथा

 युधिष्ठिर महाराज को इस व्रत का  महत्व समझाते हुए,  इस व्रत  की कथा का वर्णन श्री कृष्ण द्वारा किया गया |

प्राचीन काल में मुच्चुकंद  नाम का एक राजा था , बड़ा ही प्रतापी , धर्मात्मा , न्याय प्रिय , जनता का प्रिय, बेहद भक्ति भाव वाला  | उसकी दोस्ती,  इंद्र, कुबेर , यमराज , वरुण इत्यादि से थी |

राजा की  एक बेटी थी जिसका नाम चंद्रभागा था |

जब चन्द्रभागा विवाह योग्य हुई तब राजा ने  एक बड़े नगर के राजा चंद्रसेन के पुत्र शोभन के साथ उसका विवाह करा दिया | चंद्रभागा अपनी पति शोभन के साथ बेहद खुश थी | उसका पति बेहद दुबला पतला था मगर दिखने में बहुत खूबसूरत |

एक बार वह कुछ दिनों के लिए मायके आई हुई थी  | उसे लिवाने उसका पति शोभन आ पहुंचा , वह दशमी का दिन था , राजा ने घोषणा करा दी की कल  रमा एकादशी का व्रत है कोई भी प्राणी कल  अन्न , जल ग्रहण नहीं करेगा |

चंद्रभागा को अपने पति की चिंता होने लगी , वह अपने पति  शोभन से बोली  आप तो भूखे रह नहीं सकते आप वापस चले जाइए , आप व्रत नहीं कर पायेंगे |  यहाँ तो जानवर भी रमा एकादशी के दिन भूखे रहते हैं |  शोभन बोला कोई बात नहीं जैसी हरि इच्छा , मैं  व्रत रखूँगा |

अगले दिन मुच्चुकंद  के राज्य में सभी प्राणियों ने व्रत किया | शोभन की हालत बिगड़ने लगी , रात को जागरण तथा पूजा पाठ हो  रहा था,तब   शोभन भूख बर्दाश्त नहीं कर सका , और उसने प्राण त्याग दिए |

शोभन की  अंत्येष्टि कर दी गयी |  हर तरफ खामोशी छा गयी | चंद्रभागा  शोभन के गुज़र जाने के बाद पिता के पास ही रहने लगी |

भूखे रहने  के कारण शोभन की मृत्यु हुई लेकिन इसी व्रत को करने के कारण शोभन को उच्च गति प्राप्त हुई |

शोभन मृत्यु के बाद मंदराचल पर्वत पर सर्वोच्च  शिखर का शासक बना |

उसका राज्य देवताओं के समान था , उसका राजमहल रत्नों , मणिओ से सुसज्जित था , गंधर्व और अप्सराएँ उसकी सेवा करते थे | उसे सुख संपत्ति और ऐश्वर्य की कोई कमी न थी |

एक रोज़ तीर्थ यात्रा करते हुए राजा  मुच्चुकुंद के राज्य का एक ब्राह्मण सोम शर्मा  मंदरांचल पर्वत पंहुचा | वहां का नज़ारा देख अत्यंत मोहित हुआ | उन्होंने  शोभन को वहां राजा के रूप में  देखा  तो उनके आश्चर्य की सीमा न रही   | ब्राह्मण  ने शोभन से वार्तालाप किया और उनसे सब वृत्तांत पूछा | शोभन ने बताया की रमा एकादशी का व्रत करने  के कारण उसे यह सब प्राप्त हुआ है ,उन्होंने यह भी बताया  कि यह सब अस्थाई है , जिसका मुझे बेहद दुःख है |  हे ब्राह्मण  – क्या आप इस सुख को स्थाई  बनाने में मेरी मदद कर सकते हैं  | ब्राह्मण बोले यह सुख स्थाई क्यों नहीं है ? क्या कारण है ?  राजा शोभन बोले मैंने यह व्रत मजबूरी में किया था अपनी इच्छा से नहीं , इस कारण सुख तो  मिला किन्तु कुछ ही समय के लिए , यह सब जल्द ही  नष्ट हो जाएगा | यदि यह व्रत मैंने श्रद्धा पूर्वक किया होता तो अच्छा  होता |

राजा शोभन बोले , हे ब्राह्मण आप मेरी पत्नी से मिल कर सब हाल कहिये , वही इसका हल निकाल सकती है | ब्राह्मण ने ऐसा ही किया , चंद्रभागा से मिलकर सब वृत्तांत कह सुनाया |

चंद्रभागा को यह वृत्तांत सुन कर  अति हर्ष हुआ | वह ब्राह्मण से बोली हे ब्राह्मण – कृपया मुझे मेरे पति के पास ले चलिए , में उनके पास जल्द से जल्द जाना चाहती हूँ |

 हे ब्राह्मण – मैं अपने उन सभी एकादशी  व्रत के फलों को  अपने पति को सौंप दूंगी जो मैंने आज तक करे हैं , ऐसा करने से उनका ऐश्वर्य स्थाई हो जायेगा |

वे दोनों मंदरांचल पर्वत की ओर चल दिए | रास्ते में ऋषि वामदेव का आश्रम आया ,  वे दोनों  वहां गए और ऋषि को सब हाल  कह सुनाया , ऋषि वामदेव ने वेदों के मंत्र का उच्चारण करके चंद्रभागा पर जल छिड़का , जिससे चंद्रभागा में एक तेज उत्पन्न हो गया , आशीर्वाद लेकर वे दोनों राजा शोभन के पास पहुंचे |

राजा शोभन अपनी पत्नी को देख अति हर्षित हुआ | उसने चंद्रभागा को अपने साथ सिंहासन पर बैठाया | अपनी रानी बनाया |

रानी चंद्रभागा राजा  शोभन से बोली मैंने आज तक जितने भी एकादशी  व्रत किये हैं मैं  ऋषि वामदेव की कृपा  से  तथा ब्राह्मण सोम शर्मा की मदद से  आपको उन सब का फल प्रदान करने आई हूँ | ऐसा करते ही आपका राज्य , आपका  ऐश्वर्य  स्थाई हो जाएगा | यह सुनकर राजा अति हर्षित हुआ |

रानी चंद्रभागा और राजा शोभन ने बहुत वर्षों तक मंदराचल पर राज किया |

कृष्ण जी बोले _ हे युधिष्ठिर , प्रत्येक मास  में प्रत्येक मनुष्य को एकादशी का व्रत करना चाहिए और निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए |

शुक्लपक्ष तथा कृष्णपक्ष की एकादशी में भेद नहीं करना चाहिए , सभी महत्वपूर्ण हैं |

रमा एकादशी की कथा का पठन  अथवा श्रवण करना चाहिए , यह व्रत करने से पुण्य फल प्राप्त  होता है , आध्यत्मिक जीवन में उन्नति होती है , समस्त पापों से मुक्ति मिलती है , और मनुष्य  मृत्यु उपरान्त विष्णु लोक को प्राप्त करता  है |

युधिष्ठिर बोले – हे कृष्णा , हे कान्हा , यह वृत्तांत सुन  कर मुझे अति हर्ष हो रहा है | आपने मुझ पर बहुत उपकार किया है  | मैं इस व्रत को हमेशा अपने परिवार के साथ किया करूँगा |

ॐ नमो वासुदेवाय नमः

 

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *