नर्क चतुर्दशी 2021

कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है।  इस वर्ष 3 नवंबर को यह पावन दिन आएगा l  इस दिन को रूप चौदस /रूप चतुर्दशी,   काली चौदस/ काली  चतुर्दशी तथा नर्क चौदस/ नर्क  चतुर्दशी भी कहते है । आज ही के दिन छोटी दिवाली भी मनाई जाती है। 

इन सभी नामों के पीछे कुछ  कहानियां है। 
यह दिन बंगाल में काली चौदस के नाम से विख्यात है , क्योंकि इस दिन माँ काली अवतरित हुईं थी । 
इस दिन माँ काली का पूजन किया  जाता है और  उन्हें प्रसन्न किया जाता है , उनके आशिर्वाद से शत्रुओं पर विजय मिलती है ।
 
यह दिन भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय है । अन्य स्थानों पर यह दिन रूप चौदस के रूप में भी जाना जाता है । इस दिन भगवान श्रीकृष्ण तथा विष्णुजी की पूजा-अर्चना की जाती है ।
इस दिन सुबह सूर्य उदय से पूर्व उठकर,  तिल के तेल से मालिश कर अपामार्ग की टहनियों को पानी में डालकर नहाया जाता है । कृष्ण जी तथा विष्णुजी की पूजा की जाती है । उन्हें भोग लगाया जाता है ।
 
इस दिन के बारे में एक कथा कही गई है –
 
हिरण्यगर्भ नामक नगर में योगीराज ने    जब समाधि में ध्यान लगाना चाहा तब उनके शरीर पर कीड़े चिपकने लगे, शरीर कुरूप होने लगा और वे ध्यान नहीं लगा पाए । नारद मुनि के कहने पर उन्होंने इस तिथि यानी कार्तिक माह की चतुर्दशी पर व्रत किया और श्रीकृष्ण से अनुरोध किया कि इस कष्ट से मुक्ति दिलाएं । व्रत सफल हुआ और श्रीकृष्ण की कृपा से उन्हें उनका रूप वापस प्राप्त हुआ ।
इस कारण इस दिन को रूप चतुर्दशी कहा गया ।
माना गया है कि इस दिन खूब स्वच्छ रहना चाहिए तथा इत्र लगाना चाहिए , स्त्रियों को खूब श्रृंगार करना चाहिए ।
ऐसा करने से व्यक्ति का आकर्षण निखरता है। 
 
इस वर्ष स्नान का मुहूर्त सुबह  6 बज कर 6 minute से 6 बज कर 34 minute तक है।
 
एक कथा दानव नरकासुर की भी है जिस कारण यह दिन नर्क चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है। 
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर का वध कर 16000 कन्याओं को बचाया था जो नरकासुर के पास बंदी थी ।
बाद में इन कन्याओं के आग्रह करने पर श्रीकृष्ण ने इन सब  से विवाह किया ताकि समाज में उन्हें तिरस्कार ना  सहन करना पड़े। 
इसलिए इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना विशेष महत्व रखती है । 
शाम के समय यम पूजा की जाती है ,दीपदान किया जाता है । इस दिन यम पूजा करने से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त होता है ।
रात को सोने से पहले घर के बुजुर्ग एक दिया जलाते हैं और घर के हर कोने में उस दिए को घुमाते हैं और घर से दूर ले जाकर रख आते हैं ।
ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से पूरे घर की नकारात्मकता दिए के साथ बाहर चली जाती है ।
 
मुझे उम्मीद है कि यह दिन आप के लिए शुभ हो और आप को इस लेख से लाभ हो । आप भी अपने घर से नकारात्मकता को दूर करें , रूप पायें और दीर्घायु हों ।
 
 
 
 
 

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